सबसे कम उम्र की महिला सांसद रक्षा खडसे से विशेष बातचीत
| 23 Jul 2016
| Vidya Shankar Tiwari, Editor, NOP

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक महिला सशक्तिकरण है। उनका बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान काफी चर्चित रहा।
पहली बार जब वह रायसीना हिल्स पहुंचे तो भी अपना वादा नहीं भूले और अपने मंत्रिपरिषद में नौ महिलाओं को जगह दी। इत्तेफाक की बात है कि देश की सबसे कम उम्र की सांसद श्रीमती रक्षा खडसे भी उन्हीं की पार्टी से हैं। ओंकारेश्वर पाण्डेय-विद्याशंकर तिवारी ने उनके सियासी सफर पर लंबी बातचीत की। पेश है बातचीत के प्रमुख अंश

सवाल-आप ने अपना सियासी करियर पंचायत लेवल से शुरू किया और अब आप 29 साल की उम्र में देश की सबसे बड़ी पंचायत यानी संसद में है। सबसे कम उम्र की महिला सांसद के रूप में आपका अनुभव कैसा है।

जवाब-निश्चित रूप से रावेर (जलगांव) से नई दिल्ली तक का सफर काफी चुनौतीपूर्ण रहा लेकिन मैंने पहले पंचायत में काम किया है और बुनियादी चीजों को जानती हूं इसलिए उससे बहुत मदद मिलती है। मेरे ससुर एकनाथ खडसे काफी अनुभवी राजनीतिज्ञ हैं इसलिए सियासत की सीढ़ियां चढ़ने उतरने में कोई खास दिक्कत नहीं हुई। हां यहां पर सीखने के लिए बहुत कुछ है।

सवाल-महिलाएं लोगों की भावनाओं को जल्दी समझती हैं, चूंकि आपने पंचायत में भी काम किया है इसलिए लोगों की भावनाओं को नजदीक से जाना, समझा है।
क्या चाहते हैं लोग ?

जवाब-लोग चाहते हैं कि राजनीतिज्ञ उनके बीच आयें, उनकी समस्याओं को समझें। मिलने जुलने से निजी जुड़ाव भी होता है, जब मैं जिला पंचायत में थी तो लोगों के पास काफी आना जाना था, अब भी कोशिश करती हूं कि जितनी मदद हो सके क्षेत्रवासियों की मदद करूं।
सवाल-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कभी बातचीत का मौका मिला, महिलाओं के लिए सरकार की क्या योजनाएं हैं। जवाब-हां दो बार प्रधानमंत्री जी से मिली हूं, बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओं के लिए काम किया था, उसके बारे में उन्हें बताया था। काफी खुश हुए थे और बोले कि अपने राज्य और क्षेत्र में मेहनत से काम करते रहिए।

सवाल-आपसे क्षेत्र में लोग पूछते नहीं है कि मोदी जी ने अच्छे दिन लाने का वादा किया था, कहां हैं अच्छे दिन।

जवाब- मोदी जी और उनकी कार्यप्रणाली को समझने की जरूरत है, वह अनुशासित होकर खुद काम करते हैं और वैसे ही दूसरों से उम्मीद करते हैं। केंद्र सरकार ने दो साल में बहुत काम किये हैं, जरूरत है उसे लोगों तक पहुंचाने की। अभी किसानों के लिए सरकार जो बीमा योजना लेकर आई है वह बहुत महत्वपूर्ण है। तीन स्तर पर फसलों की बीमा की व्यवस्था की गई है।
सवाल-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वच्छता पर विशेष जोर है, जब सरकार बनी तो इसके लिए अभियान चलाया गया लेकिन योजना का असर नहीं दिखता।

जवाब-देखिये ऐसे अभियान लोगों की भागीदारी से चलते हैं, अभियान चल रहा है जब तक लोग जागरूक नहीं होंगे सफाई कैसे होगी। अपने घर और गलियों की चिंता हमें खुद करनी है। जिस दिन लोगों में जागरूकता आ गई देश संवर जाएगा।

सवाल-पांच साल में से दो साल बीत गये, आगे का एजेंडा क्या है ?

जवाब-मेरा क्षेत्र काफी बड़ा है लिहाजा एक ही क्षेत्र में लोगों की समस्याएं और सोच अलग-अलग है। मैं कोशिश करती हूं कि सब जगह जाऊं, समयास्याओं को समझूं। जब संसद सत्र नहीं होता है तब मैं दस से बारह गांव रोज घूमती हूं, उनकी समस्याओं के निदान के लिए अफसरों के साथ बैठक करती हूं। बिजली, पानी और सड़क जैसी समस्याएं आम है। परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने नेशनल हाइवे के लिए दो हजार करोड़ मंजूर किये हैं।
सवाल-अभी आप केंद्र सरकार से अपने क्षेत्र के लिए क्या चाहती हैं।

जवाब-अजंता एलोरा के लिए अच्छी ट्रेन चाहते हैं इससे टूरिज्म बढ़ेगा और हमारे क्षेत्र के लोगों को भी फायदा होगा। यद्यपि हमारा क्षेत्र थोड़ा दूर है लेकिन जब इलाके का विकास होगा तो क्षेत्र का भी विकास हो जाएगा।

सवाल-कुछ निजी सवाल, आप राजनीति में कैसे आर्इं, क्या शुरू से इस तरफ रुझान था ?

जवाब-आपने मेरा घर देखा, कैसा लगा, मैं मूलत: इंटीरियर डिजाइनर हूं और इसी फिल्ड में जाना चाहती थी लेकिन नियति सियासत में खींचकर ले आई।

सवाल-यह सब कैसे हुआ ?

जवाब-दरअसल मैं जिस समुदाय से आती हूं, वहां पर शादी जल्दी हो जाती है। मेरी भी शादी जल्दी हो गई थी, केवल 19 वर्ष की उम्र में। अभी मैं 29 साल की हूं और मेरे दो बच्चे-नौ साल की बेटी और पांच साल का बेटा है। मेरे पति अब इस दुनिया में नहीं है। एमएलसी चुनाव हारने के बाद उन्होंने मौत को गले लगा लिया था। केवल सोलह वोट से हारे थे, शायद इस सदमे को बर्दाश्त नहीं कर पाये।

सवाल-राजनीति के आलावा खाली समय में और क्या करती हैं।

जवाब- मेरे दो स्कूल हैं, पिछले साल पति के नाम पर खोला है, मामूली फीस लेकर बच्चों को पढ़ाते हैं, मकसद है शिक्षा की रोशनी को फैलाना। मुझे सामाजिक काम करना अच्छा लगता है, लोगों की मदद करके सुकून मिलता है। मैं एमपी- एमएलए नहीं बनना चाहती थी लेकिन नियति ने यहां तक पहुंचा दिया।

सवाल-आप सबसे कम उम्र की महिला सांसद हैं, महिलाओं की अलग तरह की समस्याएं होती है, उस पर सबकी नजर रहती है, आपका क्या मानना है।

जवाब- देखिये इसमें कोई दो राय नहीं कि समाज को महिलाओं से ज्यादे अपेक्षाएं होती है खास तौर से उसके चरित्र को लेकर लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि महिला भी खुद इन बातों को जानती समझती है और खुद वो ध्यान भी रखती है। हां यह जरूर है कि उसकी सुरक्षा को लेकर काफी कुछ किया गया है और अभी बहुत कुछ करने की जरूरत है।

(रक्षा खडसे भारत की सोलहवीं लोक सभा में सबसे कम उम्र की महिला सांसद हैं। २०१४ के चुनावों में वह महाराष्ट्र के रावेर से निर्वाचित हुईं। वह भारतीय जनता पार्टी से संबद्ध हैं।)




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